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Monday, April 15, 2019

कविता, तू एक कमाल है!

 


 
 
 
 
 
 
 
 
जिसमें कवि आज़माये, अनगिनत संभावनाएँ
बना के संसार का चित्र, घोल के नवरसों का मिश्र


पात्रों से बनी एक कथा, कभी निरीक्षण, कभी व्यथा
तू कलम से जन्मी रचना है,
कविता, तू एक कल्पना है!

राजनीति को ललकारे, शब्दों की तलवारें
करे समाज में बवाल, पूछ के कठिन सवाल
हो परिवर्तन का नारा या करनी प्रस्तुत विचारधारा
क्षमता तुझ में विशाल है,
कविता, तू एक मशाल है!

बन के मन का दर्पण, करे भावनाओं का वर्णन
शब्दों को कर नियुक्त, करे विचारों को मुक्त
उम्र के साथ रूप बदलती, कभी विस्तृत कभी सरल सी
तू मानव की अभिव्यक्ति है,
कविता, तू एक शक्ति है!

तू देती जवाब है, तू पूछती सवाल है,
तू गद्य भी, तू पद्य भी... कविता, तू एक कमाल है!

Friday, January 18, 2019

~ राधा ~

'वियोग' मानो अब राधा का दूसरा नाम था,
उदासी उसकी कृष्ण के जाने का परिणाम था|
मुरली का मधुर स्वर कहाँ वह भूल पायी थी,
निर्जीव बने वृन्दावन सी राधा भी मुरझाई थी!
दिन अकेलेपन में बीते, अधूरेपन में रातें ढलीं,
मन प्यासा रहा भले ही आँखों से बरसातें बहीं!
कहने को वह पत्नि थी, बहन और बेटी थी,
पर कृष्ण की याद में, हर क्षण अकेली थी|
कभी कर्तव्य, कभी रीति, कैसे मिल पाते दोनों?
एक-दूसरे के बिन लेकिन, कैसे जी पाते दोनों?

बिनती कर उद्धव को, मथुरा ले जाने,
चल पडी राधा रानी, श्री को गले लगाने|
"कैसी है मथुरा नगरी, कौन लोग हैं वहाँ?"
असमंजस में उद्धव ने राधा को समझाते कहा-
"मथुरा नगरी कृष्ण की- विशाल और स्वर्णीय है,
रानियों में उसकी रुक्मिणी- सत्यभामा सर्वप्रिय हैं|"
"उद्धव, श्री के जीवन में तो सुख का आभाव नहीं,
उसमें मैं? नहीं... 'स्वार्थ' प्रेम का स्वभाव नहीं!
वह नहीं, पर उसकी यादें मेरे साथ हैं,
वह ख़ुश रहे यही मेरे लिए पर्याप्त है!"

"शब्द ये प्रेम भरे, राधे, किसी और ने भी कहे थे,
दुःख वियोग के, बिना बोले, किसी और ने भी सहे थे!
नि:स्वार्थता जितनी तुम में है, उतनी ही अनय में...
तुम्हारे विरह में जीया है, वह भी उसी समय में!
तुम 'कृष्ण' की छवि, तो अनय  'राधा' का स्वरूप,
बोलो हुए न तुम दोनों, राधा-कृष्ण के अनुरूप?"
कहता था श्याम सदैव, "राधे, तुम-मैं एक"...
अब समझ गयी थी वह, बात उसकी प्रत्येक|
एक राधा कृष्ण के मथुरा से लौटने की प्रतीक्षा करती...
एक राधा वृन्दावन से राधा के लौटने की राह तकती...

लौट गोकुल जा मिली, राधा- 'अपने आप' से,
मुक्त हो गए ...दोनों... प्रेम-वियोग के श्राप से!


Sunday, August 23, 2015

तुम कभी कभी समझ नहीं आते हो ... ~Fundamental confusion of the Indian youth

तुम हो... कुछ हो!
दरिया है तुम्हारे अंदर, साँसों में तूफ़ान है,
खून खौलता लावा, मर-मस्तिष्क में बवाल है!
भवंडर हैं कदम कदम पर और खुद ही से जूझते हो?
क्यों  किसी की विचार-धाराओं में अस्तित्व अपना ढूँढ़ते  हो?
क्रांति क्रांति चिल्लाते हो...
शांति की आशा भी रखते हो...
तुम कभी कभी समझ नहीं आते हो!

किसने बेड़ियाँ बाँधी तुम पे, तुमने और कितनों पे बाँधी?
संस्कृति की बातें सुनायीं बहुत, और सभ्यता पे रोक लगायी?
बदलाव की बातें करते हो, कहाँ जा कर बसते हो!
कौनसी सत्ता, कैसे नारे, किसको दिनभर कोसते हो?
गंदगी में पैर रखते हो...
फिर पैर को साफ करते हो...
तुम कभी कभी समझ नहीं आते हो!

कौन गुरु, कपटी कौन, कौन भगवान ज्ञात नहीं!
रखना तो है किसी पे विश्वास, फिर आत्मविश्वास क्यों नहीं!
है इन्सानियत इतनी दुर्लभ, कि जिसने दिखाई भगवान है,
बाकी या तो बेरहम, या बेरहमी से परेशान हैं!
डर पैदा करते हो...
उसी डर से रुक जाते हो...
तुम कभी कभी समझ नहीं आते हो!



















(The author does not own copyright of any picture. Pic courtesy:internet)

Sunday, September 14, 2014

भाषा की परिभाषा


कोई आँसुओं से सुनाये गाथा, कोई खुशियों भरे स्वर है गाता!
और एक तुम- हाथ जोड़े बोल रहे हो, "भाषा यह हमको नहीं आता"!
जुड़ जायेंगे शब्द कहीं, तुम व्यक्त करने का प्रयास करो,
क्यों कोस रहे हो जगह-धर्म-जात को, भाषा बनेगी तुम बात करो!

देखो माँ गीत गुनगुना के, बच्चे को अपने सुला रही,
न समझे बोल वह नन्ही जान, पर माँ से उसको गिला नहीं!
भावना जानवर भी समझ लेते हैं, तुम तो इन्सान हो, नाज़ करो,
परिवार है यह भी तुम्हारा, भाषा बनेगी तुम बात करो!

जब आतंक छा जाता है, या व्याधि से शरीर बंध जाता है,
ख़ुशी आसमान छूं लेती है जब, या गरीबी से जीवन लद जाता है,
क्या बनती है बंधन भाषा तब? इस तथ्य पर विचार करो!
मिट जाने दो भेद सारे, भाषा बनेगी तुम बात करो!
ख़ुशी और दर्द का इज़हार करो... भाषा बनेगी तुम बात करो! :)







इन्सान ने भाषा बनायीं है.. पर भाषा इन्सान की पहचान नहीं हो सकती! आज १४ सितंबर, 'हिन्दी दिवस' है| हिन्दी सुंदर भाषा है, और मेरी सबसे प्रिय भाषा! हर भाषा सुन्दर है और शब्दों को तथा इन्सानों को जोड़ना ही किसी भी भाषा की असली परिभाषा है!